वेलेंटाइन डे: एक विनाशकारी फितना
✍ मुफ्ती मुहम्मद अताउल्लाह समीई
📍 माहदुश्शरीया अल इस्लामिया, मवाना, मेरठ, यूपी, हिंदुस्तान
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यह दिन हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है, जिसमें लड़के और लड़कियाँ एक-दूसरे से प्रेम का इज़हार करते हैं।
आज की दुनिया में पश्चिमी सभ्यता ने मुस्लिम घरों तक अपने झूठे रीति-रिवाज पहुँचा दिए हैं। इन्हीं में से एक है “वेलेंटाइन डे”, जिसे “प्रेम दिवस” कहा जाता है। लेकिन हकीकत में यह बेशर्मी, फूहड़पन और नैतिक पतन का ज़रिया बन चुका है। दुख की बात यह है कि नासमझ माता-पिता भी अपनी औलाद को इस फितने में फँसते देखकर चुप रहते हैं।
आइए देखते हैं कि यह दिन क्यों बुरा है और हमें इससे क्यों बचना चाहिए।
वेलेंटाइन डे की सच्चाई और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वेलेंटाइन डे: हकीकत या अफसाना?
वेलेंटाइन डे के बारे में कई कहानियाँ मशहूर हैं, जिनमें कुछ ऐतिहासिक तथ्य भी हैं और कुछ काल्पनिक बातें समय के साथ जोड़ दी गईं। यह दिन एक ईसाई पादरी “वेलेंटाइन” से जोड़ा जाता है, जिसकी ज़िंदगी और मौत के बारे में अलग-अलग किस्से सुनाए जाते हैं। आइए, प्राचीन रोमन युग से लेकर विक्टोरियन युग तक इन कहानियों पर नज़र डालते हैं।
1. शादियों पर पाबंदी और वेलेंटाइन की अवज्ञा
तीसरी सदी ईसवी में रोम का सम्राट क्लॉडियस द्वितीय अपनी सेना को मजबूत बनाना चाहता था। लेकिन उसे एक समस्या का सामना करना पड़ा:
शादीशुदा पुरुष युद्ध में जाने के बजाय अपने परिवार के साथ रहना पसंद करते थे।
सम्राट ने इसका हल यह निकाला कि शादियों पर प्रतिबंध लगा दिया, ताकि नौजवान पुरुष मजबूर होकर सेना में भर्ती हो जाएँ।
लेकिन एक ईसाई पादरी “वेलेंटाइन” ने इस शाही आदेश को मानने से इंकार कर दिया। वह गुप्त रूप से शादियाँ करवाने लगा और प्रेमी जोड़ों को विवाह के बंधन में बाँधने लगा। जब राजा को यह पता चला, तो उसने वेलेंटाइन को गिरफ्तार कर लिया और 14 फरवरी को उसे मौत की सज़ा दे दी।
बाद में ईसाइयों ने उसे “प्रेम का नायक” बना दिया और उसके नाम पर यह दिन मना लिया।
2. कैदियों की मदद और वेलेंटाइन की सज़ा
एक दूसरी कहानी के अनुसार, वेलेंटाइन केवल गुप्त शादियाँ नहीं करवा रहा था, बल्कि वह रोमन जेलों में क़ैद ईसाइयों को भागने में भी मदद कर रहा था।
चूँकि उस समय ईसाइयों को पसंद नहीं किया जाता था, इसलिए उन्हें कड़ी यातनाएँ दी जाती थीं।
जब रोमन शासकों को यह पता चला कि वेलेंटाइन क़ैदियों को रिहा करवा रहा है, तो उन्होंने उसे पकड़कर जेल में डाल दिया और बाद में मौत की सज़ा दे दी।
ईसाइयों ने उसे “शहीद” मान लिया और उसके नाम पर यह दिन मना लिया।
3. जेलर की बेटी और “तुम्हारा वेलेंटाइन”
एक तीसरी कहानी के अनुसार, जब वेलेंटाइन को जेल में डाला गया, तो वहाँ के जेलर की अंधी बेटी उससे मिलने आया करती थी।
कहा जाता है कि वेलेंटाइन ने प्रार्थना करके उसकी आँखों की रोशनी वापस दिलाई।
इससे जेलर की बेटी उस पर मोहित हो गई।
फाँसी से पहले वेलेंटाइन ने उस लड़की को एक पत्र लिखा, जिसके आखिर में उसने “तुम्हारा वेलेंटाइन” (Your Valentine) लिखा।
यह वाक्य बाद में प्रेमी जोड़ों के बीच प्रचलित हो गया और लोग 14 फरवरी को प्रेम पत्र और कार्ड भेजने लगे।
इन तमाम कहानियों के बावजूद वेलेंटाइन डे की असली सच्चाई आज भी संदिग्ध है।
समय के साथ यह व्यापारिक अवसर बन चुका है, जहाँ उपहार, फूल, ग्रीटिंग कार्ड और अन्य चीज़ों की बिक्री बढ़ा दी जाती है।
क्या एक मुसलमान को किसी ईसाई पादरी के अंधविश्वास और गलत विचारों को अपनाना चाहिए?
तर्कसंगत पहलू: वेलेंटाइन डे के नुक़सान
1. यह युवा पीढ़ी को नष्ट कर रहा है
इस दिन के बहाने लड़के और लड़कियाँ ग़लत रिश्तों में पड़ जाते हैं, जो अंततः अवैध संबंध, अनैतिकता और व्यभिचार तक जा पहुँचते हैं।
कितने ही माता-पिता अपनी इज़्ज़त खो बैठते हैं, और कितनी ही लड़कियाँ धोखा खाकर ज़िंदगी बर्बाद कर बैठती हैं!
2. पारिवारिक व्यवस्था का विनाश
अब शादीशुदा लोग भी इस दिन को मनाने लगे हैं, जिससे अवैध संबंध बढ़ रहे हैं।
पत्नियाँ अपने पतियों से शिकायत करने लगी हैं, पति बाहर प्रेम तलाशने लगे हैं, और इस तरह परिवार टूट रहे हैं।
3. फिज़ूलखर्ची और दिखावा
फूल, उपहार, ग्रीटिंग कार्ड, होटल में डिनर—यह सब एक धोखा है।
युवा अपनी मेहनत की कमाई प्रेम के छलावे में गँवा देते हैं, जबकि उनके माता-पिता रोटी के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण: वेलेंटाइन डे की शरई स्थिति
1. यह ग़ैर-मुसलमानों की नकल है
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“जो किसी क़ौम की नकल करेगा, वह उन्हीं में से होगा।” (अबू दाऊद: 4031)
क्या हम एक ईसाई परंपरा को अपनाकर क़यामत के दिन उन्हीं के साथ उठना चाहते हैं?
2. अनैतिकता के क़रीब भी मत जाओ
क़ुरआन में है:
“और ज़िना (व्यभिचार) के क़रीब भी मत जाओ, यह निश्चय ही अश्लीलता और बुरा मार्ग है।” (सूरतुल इसराः 32)
वेलेंटाइन डे इसी दिशा में ले जाता है।
3. असली प्रेम तो अल्लाह और उसके रसूल से होना चाहिए
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“तुम में से कोई भी सच्चा ईमान वाला नहीं हो सकता जब तक मैं उसे उसके माता-पिता, औलाद और तमाम लोगों से अधिक प्रिय न हो जाऊँ।” (बुखारी: 15)
माता-पिता के लिए संदेश: आँखें खोलें!
अगर आपने अपनी औलाद को इस फितने से न बचाया, तो यही औलाद आपके लिए दुनिया में रुसवाई और आख़िरत में सज़ा का कारण बनेगी।
अपने बच्चों को इस्लामी तालीम दें, घर में दीन का माहौल बनाएँ, और ग़लत रास्तों से बचाएँ।
हमें क्या करना चाहिए?
•वेलेंटाइन डे की सच्चाई समझें और दूसरों को भी बताएं।
• इस्लामी तहज़ीब अपनाएँ और ग़ैर-मुसलमानों की नक़ल से बचें।
• हलाल और पाकीज़ा तरीके से प्रेम करें, यानी निकाह करें।
अल्लाह हमें इस फितने से बचाए और अपनी सच्ची मोहब्बत अता फरमाए। आमीन
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